अब RSS और पीएम मोदी के बारे में होगी पढ़ाई, शुरू हुआ नया कोर्स
नई दिल्ली – अब देश के स्कूलों और कॉलेजों में RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन और विचारों को पढ़ाया जाएगा। केंद्र सरकार ने एक नया कोर्स शुरू किया है, जिसमें छात्रों को संघ के इतिहास, उसके राष्ट्र निर्माण में योगदान और पीएम मोदी के नेतृत्व के बारे में विस्तार से बताया जाएगा।
यह कोर्स देशभर के कई शैक्षणिक संस्थानों में वैकल्पिक विषय के रूप में पेश किया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को देश की संस्कृति और सेवा भावना से जोड़ना है।
कोर्स में क्या क्या पढ़ाया जाएगा?
इस नए कोर्स के तहत छात्रों को निम्नलिखित विषयों के बारे में जानकारी दी जाएगी:
- RSS का इतिहास और विस्तार – संघ की स्थापना, उसके उद्देश्य और देश के विभिन्न क्षेत्रों में उसका योगदान।
- पीएम मोदी का जीवन और नेतृत्व – उनके बचपन से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक का सफर, उनकी नीतियाँ और विकास कार्य।
- राष्ट्र निर्माण में संघ की भूमिका – आपदा राहत, सामाजिक समरसता और स्वदेशी अभियानों में RSS का योगदान।
- युवाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश – स्वयंसेवा, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम के मूल्य।
कहाँ और कब शुरू होगा यह कोर्स?
शुरुआती चरण में यह कोर्स कुछ चुनिंदा विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शुरू किया जा रहा है। बाद में इसे धीरे-धीरे अन्य संस्थानों में भी लागू किया जाएगा।
- पहले चरण में दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के 25 कॉलेजों में यह कोर्स उपलब्ध होगा।
- यह सेमेस्टर-आधारित होगा और छात्र इसे वैकल्पिक विषय के रूप में चुन सकते हैं।
- कोर्स में थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों शामिल होंगे। प्रैक्टिकल के तहत छात्रों को समाज सेवा से जुड़े प्रोजेक्ट करने होंगे।
प्रतिक्रियाएँ: समर्थन और आलोचना
समर्थकों का कहना है कि यह कोर्स युवाओं को देश के वास्तविक इतिहास और संस्कृति से जोड़ेगा। RSS के अधिकारियों ने इस पहल का स्वागत किया है। एक वरिष्ठ संघ पदाधिकारी ने कहा, "युवा पीढ़ी को देश की सेवा की परंपरा समझनी चाहिए। यह कोर्स उसी दिशा में एक कदम है।"
वहीं आलोचकों का कहना है कि किसी एक विचारधारा को पाठ्यक्रम में शामिल करना सही नहीं है। विपक्षी दलों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। एक विपक्षी नेता ने कहा, "शिक्षा का मकसद संकीर्ण सोच देना नहीं बल्कि तटस्थ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना होता है।"
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छात्र क्या कहते हैं?
जिन कॉलेजों में यह कोर्स शुरू हो रहा है, वहाँ के कुछ छात्रों ने उत्साह दिखाया है। दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा ने कहा, "मैं पीएम मोदी के बारे में और अधिक जानना चाहती हूँ। यह अच्छा अवसर है।" वहीं कुछ छात्रों ने असंतोष भी जताया। एक छात्र ने कहा, "हमें पढ़ाई के लिए आजादी मिलनी चाहिए। स्कूल-कॉलेज राजनीति से दूर रहने चाहिए।"
फिलहाल शिक्षा मंत्रालय ने साफ किया है कि यह कोर्स बिल्कुल वैकल्पिक है। किसी भी छात्र पर इसे लेने का कोई दबाव नहीं होगा। आने वाले महीनों में इस कोर्स के प्रभाव और छात्रों की रुचि पर नजर रखी जाएगी।
